गोवा स्थित घर पर आया गंभीर कार्डियक अरेस्ट, 45 मिनट तक चला जिंदगी बचाने का संघर्ष; सुबह 5:20 बजे डॉक्टरों ने किया मृत घोषित
गुड्डू किरार ✍️ मो- 9589362100
मुंबई/गोवा। हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। गुरुवार तड़के गोवा स्थित उनके आवास पर उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी और उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया। आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकीय टीम ने करीब 45 मिनट तक लगातार CPR देकर उन्हें बचाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें पुनर्जीवित नहीं किया जा सका। सुबह करीब 5:20 बजे नाना पाटेकर को मृत घोषित कर दिया गया।
मणिपाल अस्पताल के ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. शेखर सालकर के अनुसार, नाना पाटेकर को गंभीर कार्डियक अरेस्ट हुआ था। मेडिकल टीम ने लंबे समय तक CPR दिया, लेकिन शरीर ने उपचार का कोई सकारात्मक जवाब नहीं दिया। मामले में मेडिको-लीगल केस (MLC) दर्ज किया गया है और निधन की चिकित्सकीय वजह की पुष्टि के लिए पोस्टमार्टम कराया जाएगा।
चार दशक से ज्यादा सिनेमा पर छोड़ी अमिट छाप
नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था। वर्ष 1978 में फिल्म ‘गमन’ से अभिनय की शुरुआत करने वाले नाना ने हिंदी और मराठी सिनेमा में अपनी अलग और बेहद प्रभावशाली पहचान बनाई। ‘परिंदा’, ‘तिरंगा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘अब तक छप्पन’, ‘अपहरण’, ‘वेलकम’ और ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय ने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी।
‘क्रांतिवीर’ में दमदार अभिनय के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। उनके खाते में तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान रहे। वर्ष 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था।
अभिनेता ही नहीं, निर्देशक और समाजसेवी भी थे
नाना पाटेकर ने अभिनय के साथ लेखन और निर्देशन में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। वर्ष 1991 में उन्होंने ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ का निर्देशन किया। सेना के प्रशिक्षण से जुड़े अनुभव के कारण उन्हें टेरिटोरियल आर्मी में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल की रैंक भी मिली।
फिल्मों से अलग नाना पाटेकर सामाजिक सरोकारों के लिए भी पहचाने जाते रहे। किसानों और ग्रामीण परिवारों की समस्याओं को लेकर उन्होंने सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई और नाम फाउंडेशन के माध्यम से किसान कल्याण, जल संरक्षण तथा ग्रामीण विकास के क्षेत्र में योगदान दिया।
पर्दे का कलाकार नहीं, एक पूरा किरदार था नाना
नाना पाटेकर का जाना सिर्फ एक अभिनेता का जाना नहीं है। उनके साथ हिंदी और मराठी सिनेमा की वह अदाकारी भी चली गई, जिसमें संवाद केवल बोले नहीं जाते थे, बल्कि दर्शकों के भीतर उतर जाते थे। उनकी आवाज, आंखों का तेवर और किरदार में जान डाल देने की कला उन्हें अपने दौर के सबसे अलग अभिनेताओं में शुमार करती रही।
75 वर्ष की उम्र में उनके अचानक निधन की खबर से फिल्म जगत और करोड़ों प्रशंसकों में शोक की लहर है। नाना पाटेकर अब पर्दे पर नजर नहीं आएंगे, लेकिन उनके निभाए किरदार और उनकी दमदार आवाज लंबे समय तक सिनेमा के साथ जीवित रहेगी।

