कुरवाई में सत्यापन के दौरान वेयरहाउस संचालक, शिक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और स्कूल संचालक भी सूची में मिले
गुड्डू किरार ✍️ मो- 9589362100
विदिशा/कुरवाई। गरीबी रेखा (बीपीएल) की सूची में अपात्र लोगों के नाम शामिल होने के मामले में प्रशासन ने जांच तेज कर दी है। कलेक्टर अंशुल गुप्ता के निर्देश पर कुरवाई अनुभाग में बीपीएल सूची का गहन परीक्षण और सत्यापन कराया जा रहा है। जांच में ऐसे परिवार सामने आए हैं, जो आर्थिक रूप से संपन्न होने के बावजूद गरीबी रेखा की सूची में दर्ज थे और शासकीय योजनाओं का लाभ ले रहे थे। प्रशासन ने जांच में अपात्र पाए गए नामों को सूची से पृथक करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कुरवाई मोतीलाल अहिरवार के निर्देशन में चल रहे सत्यापन में अलग-अलग गांवों के हितग्राहियों की पात्रता की जांच की जा रही है। जांच का उद्देश्य वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक बीपीएल श्रेणी से जुड़ी सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना और अपात्र लोगों को सूची से बाहर करना है।
वेयरहाउस संचालक से लेकर शिक्षक तक के नाम
जांच में ग्राम पैरोखेड़ी, तहसील कुरवाई निवासी प्राण सिंह, जो वेयरहाउस संचालक हैं, को बीपीएल सूची के लिए अपात्र पाया गया है। इसी तरह पृथ्वी सिंह दांगी, जो प्राथमिक शिक्षक हैं, तथा उनकी पत्नी मीना दांगी, जो आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं, का नाम भी जांच में अपात्र पाया गया है।
इसी क्रम में ग्राम करमेड़ी, तहसील कुरवाई निवासी जयपाल यादव, जो सिरोंज क्षेत्र के पथरिया में नवांकर स्कूल संचालित करते हैं, तथा ग्राम माला निवासी राजमल पुत्र रघुवीर भी बीपीएल सूची के लिए अपात्र पाए गए हैं। संबंधित नामों को बीपीएल सूची से पृथक करने की कार्रवाई की जा रही है।
पात्र परिवारों के हक पर असर
एसडीएम मोतीलाल अहिरवार ने कहा कि बीपीएल सूची का उद्देश्य वास्तविक रूप से जरूरतमंद और पात्र परिवारों को शासन की योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराना है। आर्थिक रूप से सक्षम व्यक्ति यदि अपात्र होने के बावजूद सूची में नाम दर्ज कराकर सरकारी योजनाओं का लाभ लेते हैं तो इससे वास्तविक पात्र हितग्राहियों के अधिकार प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से सूची का सत्यापन कराया जा रहा है और जांच में अपात्र पाए जाने वाले नाम हटाए जाएंगे।
स्वेच्छा से नाम हटवाने की अपील
प्रशासन ने आर्थिक रूप से संपन्न ऐसे लोगों से भी अपील की है, जिनका नाम अभी बीपीएल सूची में दर्ज है, कि वे निर्धारित मापदंडों के अनुसार पात्र नहीं होने की स्थिति में स्वयं अपना नाम सूची से पृथक कराने के लिए आवेदन करें।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान अपात्र पाए जाने पर नाम बीपीएल सूची से हटाने के साथ पूर्व में लिए गए शासकीय आर्थिक लाभ की नियमानुसार वसूली की कार्रवाई भी की जा सकती है। बीपीएल सूची के सत्यापन की यह कार्रवाई आगे भी जारी रहने की बात प्रशासन ने कही है।

