विदिशा में जगह-जगह आतिशबाजी के भंडारण की चर्चा, सुरक्षा इंतजामों पर सवाल; रिहायशी बस्तियों में बड़ी मात्रा में पटाखे जमा , जांच और जवाबदेही तय करने की जरूरत
गुड्डू किरार ✍️ मो- 9589362100
विदिशा। शहर की घनी आबादी वाले रहवासी क्षेत्रों में पटाखों के भंडारण को लेकर सुरक्षा संबंधी सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि रिहायशी इलाकों में बड़ी मात्रा में आतिशबाजी का स्टॉक किया जा रहा है, तो यह न केवल आसपास रहने वाले परिवारों की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है, बल्कि प्रशासनिक निगरानी और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की भी परीक्षा है। जरा-सी चूक आगजनी की बड़ी घटना में बदल सकती है। ऐसे में सवाल है कि क्या संबंधित विभागों ने समय रहते जांच और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए हैं?
घरों के आसपास बारूद का भंडार, सुरक्षा की गारंटी कौन देगा?
पटाखे ज्वलनशील और विस्फोटक प्रकृति के होते हैं। इनके भंडारण और बिक्री के लिए निर्धारित नियमों, लाइसेंस तथा सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी है। घनी बस्ती के बीच यदि नियमों के विपरीत बड़ी मात्रा में पटाखे रखे गए हैं, तो आग लगने की स्थिति में नुकसान केवल स्टॉक तक सीमित नहीं रहेगा। आसपास के मकान, दुकानें और उनमें रहने वाले लोग भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।
ऐसे में प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि शहर के रहवासी क्षेत्रों में पटाखों का भंडारण नियमानुसार हो रहा है या नहीं। जहां भी नियमों के उल्लंघन की शिकायतें हैं, वहां तत्काल निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
रातोंरात शहर में कैसे पहुंच रहा पटाखों का स्टॉक?
त्योहारी सीजन में पटाखों की आवक और मांग बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन बड़ी मात्रा में आतिशबाजी का परिवहन और भंडारण सुरक्षा के सवाल भी खड़े करता है। शहर में पटाखे लेकर आने वाले वाहनों की जांच, परिवहन संबंधी नियमों का पालन और संबंधित प्रतिष्ठानों के दस्तावेजों का सत्यापन जरूरी है।
यदि बड़ी खेप शहर में पहुंच रही है, तो यह भी जांच का विषय है कि वाहनों की नियमानुसार जांच हुई या नहीं और पटाखों को किन स्थानों पर उतारकर रखा जा रहा है।
दूसरे शहरों की घटनाओं से भी नहीं लिया सबक?
देश के विभिन्न हिस्सों में आगजनी और विस्फोट की घटनाएं यह चेतावनी देती रही हैं कि ज्वलनशील सामग्री के भंडारण में लापरवाही कितनी गंभीर साबित हो सकती है। ऐसे में किसी बड़े हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले ही संभावित खतरे की पहचान करना जरूरी है।
विदिशा में भी प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन विभाग और संबंधित अधिकारियों को संयुक्त निरीक्षण कर संवेदनशील स्थानों की पहचान करनी चाहिए। नियमों के विरुद्ध भंडारण पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
हादसा हुआ तो जिम्मेदारी किसकी होगी?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि किसी रहवासी क्षेत्र में पटाखों के अवैध या असुरक्षित भंडारण के कारण आगजनी अथवा विस्फोट होता है, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? संबंधित स्टॉक रखने वाले व्यक्ति के साथ-साथ अनुमति, निरीक्षण और निगरानी से जुड़े पहलुओं की भी जांच करनी होगी।
प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि शहर में पटाखों के भंडारण के लिए कितने वैध लाइसेंस जारी हैं, किन स्थानों पर भंडारण की अनुमति है और सुरक्षा मानकों के सत्यापन के लिए क्या कार्रवाई की गई है।
सवाल साफ है—क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद जागेगा, या समय रहते जांच कर शहरवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा? त्योहार खुशियों का प्रतीक हैं, खतरे का नहीं। इसलिए पटाखों के भंडारण और परिवहन की निष्पक्ष जांच अब जरूरी है।