सरकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने की कवायद पर पंचायत कर्मचारियों की लापरवाही का साया? सुल्तानिया पंचायत भवन में फिर लटका मिला ताला
गुड्डू किरार ✍️ मो- 9589362100
विदिशा। सरकार ग्रामीणों तक अपनी योजनाओं का लाभ पहुंचाने और पंचायतों को जवाबदेह बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्था की तस्वीर कई जगह इन दावों से अलग नजर आती है। विदिशा जिले की पंचायतों में पंचायत भवनों के समय पर नहीं खुलने की शिकायतें सामने आती रही हैं। विदिशा जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत सुल्तानिया में मंगलवार को भी पंचायत भवन के दरवाजे पर ताला लटका नजर आया।
ग्रामीणों के लिए पंचायत भवन शासन की योजनाओं, प्रमाण-पत्रों, पंचायत संबंधी कार्यों और विभिन्न सरकारी सेवाओं से जुड़ने का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में पंचायत भवन बंद रहने से ग्रामीणों को अपने काम के लिए भटकना पड़ सकता है। और कई किलोमीटर दूर से जिलामुख्याल अपनी समस्या के लिए पहुंचना पड़ता है।

मंगलवार को भी नहीं खुला दरवाजा
ग्रामीणों के अनुसार सुल्तानिया पंचायत भवन में नियमित रूप से ताला लटका रहने की स्थिति सामने आती रही है। मंगलवार को भी जब हम दोपहर 12:00 पंचायत भवन पहुंचे तो वहां ताला लगा मिला। इससे पंचायत से जुड़े काम कराने पहुंचे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत भवन कब खुलेगा और संबंधित कर्मचारी कब उपलब्ध होंगे, इसे लेकर भी उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाती।

योजनाओं की जानकारी कहां से मिले?
सरकार की अनेक योजनाओं का क्रियान्वयन पंचायत स्तर से होता है। ग्रामीणों को योजनाओं की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी भी पंचायत स्तर पर उपलब्ध कराई जाती है। ऐसे में यदि पंचायत भवन ही बंद मिले तो जरूरतमंद ग्रामीणों को योजनाओं की जानकारी और अपने काम के लिए दूसरी जगहों पर निर्भर होना पड़ता है।
खासकर बुजुर्ग, महिलाएं और दूरदराज के ग्रामीण पंचायत कार्यालय बंद मिलने पर सबसे ज्यादा परेशान हो सकते हैं।
पंचायत सचिव व रोजगार सहायक सहित कर्मचारियों की जिम्मेदारी पर सवाल
पंचायतों में शासन की ओर से रोजगार सहायक और अन्य कर्मचारियों की व्यवस्था की गई है, ताकि ग्रामीणों के काम समय पर हो सकें और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाया जा सके। इसके बावजूद पंचायत भवन के बंद मिलने की स्थिति व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है।
सवाल यह है कि जब पंचायत स्तर पर कर्मचारियों की नियुक्ति ग्रामीणों की सुविधा के लिए की गई है और सरकार
हर महा वेतन भी दे रही है, तो पंचायत भवन निर्धारित समय पर खुलना सुनिश्चित क्यों नहीं हो पा रहा है?
पहले भी सामने आ चुकी है ऐसी स्थिति
सुल्तानिया पंचायत भवन में ताला लगा मिलने की स्थिति मंगलवार को पहली बार सामने नहीं आई। इससे पहले भी पंचायत भवन के बंद रहने की स्थिति देखे जाने की बात ग्रामीणों द्वारा कही गई है। यदि पंचायत भवन नियमित रूप से नहीं खुल रहा है तो इसकी निगरानी और जिम्मेदारी तय करने की आवश्यकता है।
जिम्मेदारों से जवाब की जरूरत
पंचायत भवन का नियमित संचालन केवल कार्यालय खोलने तक सीमित विषय नहीं है। यह सीधे ग्रामीणों को मिलने वाली सरकारी सेवाओं और योजनाओं से जुड़ा है। ऐसे में प्रशासन को यह देखना होगा कि पंचायत भवन निर्धारित समय पर खुल रहा है या नहीं, कर्मचारी उपस्थित रहते हैं या नहीं और ग्रामीणों के काम कितनी आसानी से हो रहे हैं।
सुल्तानिया का बंद पंचायत भवन एक दिन की तस्वीर है या व्यवस्था की नियमित स्थिति—इसका जवाब संबंधित पंचायत और जिम्मेदार अधिकारियों को देना होगा।

