सामूहिक गायन में विद्यार्थियों, आचार्यों, अभिभावकों और अतिथियों ने लिया हिस्सा; वक्ताओं ने बताया गीत का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व
विदिशा। वंदे मातरम् के 150वें वर्ष के उपलक्ष्य में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के देशव्यापी ‘नमामि भारतम्’ कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, केशवनगर में वंदे मातरम् का सामूहिक गायन हुआ। विद्यालय परिसर में विद्यार्थियों, आचार्य परिवार, समिति सदस्यों, अभिभावकों और नगर के गणमान्य नागरिकों ने एक साथ राष्ट्रगीत का गायन कर राष्ट्रभाव की अभिव्यक्ति की।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता लेखक एवं वरिष्ठ पत्रकार गोविन्द सक्सेना ने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारतभूमि के प्रति श्रद्धा, सम्मान और राष्ट्रभक्ति की अभिव्यक्ति है। उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय मूल्यों को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि मेडिकल कॉलेज के उप रजिस्ट्रार भीम सिंह परमार ने कहा कि राष्ट्र के प्रति सम्मान केवल राष्ट्रीय पर्वों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि दैनिक आचरण में भी दिखाई देना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने की प्रेरणा दी।

दीप प्रज्ज्वलन से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद सामूहिक स्वर में वंदे मातरम् का गायन किया गया। गायन के दौरान विद्यालय परिसर राष्ट्रभाव के नारों और वंदे मातरम् के जयघोष से गूंज उठा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत ट्रस्ट विदिशा के जिला संयोजक अरविन्द श्रीवास्तव ने की। विशिष्ट अतिथि संगीतज्ञ एवं शासकीय शिक्षक शशिकांत शर्मा मौजूद रहे।
विद्यालय प्राचार्य शुभम चौहान ने कहा कि वंदे मातरम् के भाव में मातृभूमि के प्रति श्रद्धा, सम्मान और समर्पण निहित है। उन्होंने कहा कि विद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को इस भाव को समझने और उसे जीवन में उतारने के लिए प्रेरित करना है।
विद्यालय संचालन उप समिति अध्यक्ष मनमोहन शर्मा ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। संचालन आचार्य विनीता शाक्य ने किया। कार्यक्रम विद्यालय पाली प्रमुख संगीता राजपूत के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। समापन वंदे मातरम् के जयघोष के साथ हुआ।

