भगवान वासुपूज्य का मोक्ष कल्याणक मनाकर चढ़ाया निर्वाण लाडू, चौदस की धारा में उमड़ा जैन समाज
विदिशा। अनंत चतुर्दशी महापर्व के अवसर पर श्री शीतलनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, किला अंदर में दशलक्षण धर्म पर्व का भक्ति और श्रद्धा के साथ समापन हुआ। सुबह से ही भगवान के अभिषेक और पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर परिसर में पहुंचती रही। नित्य पूजन एवं विधान के बाद भगवान वासुपूज्य का मोक्ष कल्याणक मनाया गया तथा निर्वाण लाडू अर्पित किया गया।
दोपहर में भगवान का अभिषेक, चौदस की धारा और दशलक्षण धर्म की पूजन संपन्न हुई। चौदस की धारा का सौभाग्य प्रथम इंद्र अखिल भारतीय जैन युवा फेडरेशन, द्वितीय इंद्र प्रदुम्न सिंघई परिवार, तृतीय इंद्र अनेकांत-एकांत शीतल ज्वैलर परिवार, चतुर्थ इंद्र सतेंद्र लश्करी परिवार तथा पंचम इंद्र राजेंद्र एवं इंजीनियर राजीव जैन परिवार को प्राप्त हुआ।
‘आत्मा में रमण करना ही ब्रह्मचर्य’
मुंबई के विले पार्ले से आए पं. संयम शास्त्री ने दस दिनों तक दशलक्षण धर्म के विभिन्न स्वरूपों पर प्रवचन दिए। अंतिम दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि ब्रह्म यानी आत्मा और आत्मा में रमण करना ही ब्रह्मचर्य है। पर पदार्थ में सुख की बुद्धि ही अब्रह्म है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति पर से हटकर अपने ज्ञायक स्वरूप में लीन होता है, वही सच्चे अर्थों में ब्रह्मचर्य धर्म का पालन करता है। इस दौरान समयसार नाटिका सहित धार्मिक ग्रंथों पर मार्मिक स्वाध्याय कराया गया।
रात्रि में हुई भव्य इंद्र सभा
दशलक्षण पर्व के समापन पर रात्रि में भक्ति एवं प्रवचन के बाद भव्य इंद्र सभा का आयोजन हुआ। इसमें सौधर्म इंद्र सहित इंद्र-इंद्राणियों ने धार्मिक प्रश्नों पर संवाद किया। श्रद्धालुओं ने अनंत व्रत धारण कर सुख-समृद्धि एवं मंगल की कामना की।
कार्यक्रम में डिप्टी कलेक्टर नितिन जैन और एसडीएम मनीष जैन सहित मंदिर कमेटी अध्यक्ष मलुकचंद जैन, मंत्री एडवोकेट चक्रवर्ती जैन, रवि पटेल, राजकुमार जैन, राकेश मोदी, वीरेंद्र मानपुर, प्रकाश सिंघई, संजय अलंकार, रीतेश करैया, सुरेंद्र जैन, डॉ. एमएल जैन सहित सकल जैन समाज के श्रद्धालु मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।

