करैया रोड के बाद मुख्य मार्ग पर नगर पालिका के नाली निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल, क्षतिग्रस्त स्लैब पर दोबारा सरिया-कंक्रीट डालने की तैयारी
रिपोर्टर— गुड्डू किरार ✍️ 9589362100
विदिशा। शहर में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। पिछले दिनों करैया रोड पर निर्माणाधीन नाले के धराशायी होने का वीडियो सामने आया था। अब शहर के मुख्य मार्ग पर नगर पालिका द्वारा कराए जा रहे नाली निर्माण में भी ऐसी ही स्थिति सामने आई है। इससे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
आबकारी कार्यालय से आगे पेट्रोल पंप के पास मुख्य मार्ग से जुड़ने वाली सड़क पर कुछ दिन पहले नाली के ऊपर स्लैब डालकर सड़क क्रॉसिंग बनाई गई थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, निर्माण के कुछ ही समय बाद यह हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर धराशायी हो गया। यह स्थान शहर के प्रमुख मार्ग पर है, जहां से दिनभर आम लोगों के साथ अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी गुजरते हैं।
क्षतिग्रस्त हिस्से पर फिर शुरू हुआ काम
नाली के ऊपर बना क्षतिग्रस्त स्लैब अब दोबारा मरम्मत के दौर से गुजर रहा है। मौके पर ठेकेदार के कर्मचारी टूटे हिस्से पर काम करते नजर आए। इस हिस्से में सरिया का जाल बिछाकर दोबारा कंक्रीट डालने की तैयारी भी की जा रही है। नाली के ऊपर एक सड़क को दूसरी सड़क से जोड़ने के लिए बनाए जाने वाले इस कंक्रीट ढांचे को स्लैब या क्रॉसिंग कहा जाता है।
ऐसे में सवाल उठता है कि यदि निर्माण निर्धारित मापदंडों और गुणवत्ता के अनुरूप किया गया था तो कुछ ही दिनों में यह क्षतिग्रस्त कैसे हो गया? क्या निर्माण में इस्तेमाल सामग्री और तकनीकी प्रक्रिया की पर्याप्त जांच की गई थी?
कुछ दूरी पर जारी निर्माण में भी अनियमितताओं के आरोप
इसी मार्ग पर कुछ दूरी पर नगर पालिका द्वारा नाली निर्माण का कार्य अभी भी जारी है। मौके पर निर्माण कार्य में कई अनियमितताएं दिखाई देने की बात सामने आ रही है। निर्माण में इस्तेमाल की जा रही सामग्री की गुणवत्ता और निर्धारित मापदंडों के पालन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल है कि निर्माण कार्य के दौरान सामग्री की जांच और गुणवत्ता की निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारी मौके पर निरीक्षण करने क्यों नहीं पहुंच रहे हैं? क्या निर्माण में इस्तेमाल हो रही सामग्री की तकनीकी जांच की जा रही है या बिना जांच के ही काम आगे बढ़ाया जा रहा है?
जवाब देने से बच रहे अधिकारी?
निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है। आरोप है कि संबंधित अधिकारियों को फोन लगाने के बावजूद कई बार फोन नहीं उठाया जाता। ऐसे में निर्माण कार्यों की निगरानी और शिकायतों के निराकरण को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
यदि किसी निर्माण कार्य में गुणवत्ता संबंधी शिकायत सामने आती है तो संबंधित विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है कि मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण करें और आवश्यक कार्रवाई करें। अधिकारियों द्वारा शिकायतों पर ध्यान नहीं दिए जाने की स्थिति में जनता के बीच जवाबदेही को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
निर्माण की गुणवत्ता की जांच जरूरी
सार्वजनिक धन से कराए जा रहे निर्माण कार्यों को लेकर यह मामला गंभीर सवाल खड़े करता है। निर्माण की गुणवत्ता, इस्तेमाल की गई सामग्री, सरिया और कंक्रीट की मात्रा तथा निर्धारित तकनीकी मापदंडों के पालन की जांच की जानी चाहिए। यदि निर्माण में खामी मिलती है तो जिम्मेदारी तय कर संबंधित एजेंसी या ठेकेदार के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई आवश्यक है।
जनता के पैसे से निर्माण, जवाबदेही किसकी?
एक ओर शहर में विकास कार्यों के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर निर्माण के कुछ ही समय बाद उनके क्षतिग्रस्त होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में सवाल केवल एक नाली के निर्माण का नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन के उचित उपयोग और निर्माण कार्यों की निगरानी व्यवस्था का भी है।
अब देखना होगा कि नगर पालिका इस निर्माण की तकनीकी जांच कराती है या क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत कर मामले को आगे बढ़ा दिया जाएगा। शहरवासियों ने निर्माण कार्यों की निष्पक्ष जांच कराने और गुणवत्ता में लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

