रथ पर सवार होकर पहुंचे विघ्नहर्ता, ढोल-ताशों की थाप पर थिरके विद्यार्थी
मूषक थीम पर नन्हे कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुति ने मोहा मन
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से हुई गणेश प्रतिमा की स्थापना
गुड्डू किरार ✍️ 9589362100
विदिशा। वात्सल्य विद्यालय में सोमवार को गणपति महोत्सव का शुभारंभ भगवान गणेश की भव्य अगवानी और भक्तिमय वातावरण के बीच हुआ। रथ पर सवार गणपति बप्पा की प्रतिमा जब विद्यालय परिसर में पहुंची तो ढोल-ताशों, झांझ-मंजीरों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज से पूरा परिसर उत्सवमय हो उठा। विद्यार्थियों ने गणपति बप्पा मोरया के जयघोष के साथ उत्साहपूर्वक सहभागिता की। पारंपरिक वेशभूषा में सजे छात्र-छात्राओं ने आकर्षक नृत्य प्रस्तुतियां देकर समारोह में रंग भर दिया।

नन्हे कलाकारों ने बांधा समां
गणेश महोत्सव के दौरान छोटे बच्चों ने भगवान गणेश के वाहन मूषक की थीम पर मनमोहक सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया। हाथों में मूषक के कटआउट लेकर थिरकते नन्हे कलाकारों ने उपस्थितजनों का मन मोह लिया। विद्यार्थियों के उत्साह, ढोल-नगाड़ों की थाप और भक्तिमय जयघोष से विद्यालय परिसर में उल्लास का वातावरण बना रहा।

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच स्थापना
गणेश प्रतिमा की स्थापना वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ विद्यालय प्रमुख देवना अरोरा, नम्रता अरोरा, प्रतीक कोहली, रुचिरा अरोरा एवं संजय शर्मा द्वारा की गई। इस अवसर पर वात्सल्य महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं सहित विद्यालय परिवार की सहभागिता रही। परमपूज्य गुरुदेव ने गणेश उत्सव की स्थापना के लिए वात्सल्य विद्यालय परिवार एवं विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए आशीर्वाद प्रदान किया।
सामाजिक सरोकारों से जोड़ेंगी जागरूकता कार्यशालाएं
महोत्सव के अंतर्गत विद्यार्थियों के लिए विभिन्न जागरूकता कार्यशालाओं का आयोजन भी किया जा रहा है। इनका उद्देश्य सामाजिक एवं व्यावहारिक मुद्दों को झांकियों और रचनात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों तक पहुंचाना है। भगवान गणेश को बुद्धि और विवेक का प्रतीक मानते हुए बच्चों को आध्यात्मिक मूल्यों, भारतीय संस्कृति और सामाजिक चेतना से जोड़ने का संदेश दिया गया।
राष्ट्रीय पक्षी मोर बनी आकर्षण की थीम
स्कूल डायरेक्टर देवना अरोरा ने बताया कि इस बार गणेश महोत्सव में राष्ट्रीय पक्षी मोर को थीम बनाया गया है। इसी अनुरूप विद्यार्थियों की वेशभूषा से लेकर सजावट तक तैयार की गई। आयोजन की विशेषता यह रही कि अधिकांश सजावटी सामग्री शिक्षकों और विद्यार्थियों ने स्वयं हस्तकला के माध्यम से तैयार की। उन्होंने कहा कि महोत्सव का उद्देश्य बच्चों को केवल धार्मिक गतिविधियों से जोड़ना नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और राष्ट्रीय चेतना के प्रति जागरूक करना भी है।
कार्यक्रम के समापन पर संस्था प्रमुख देवना अरोरा ने विद्यालय परिवार, विद्यार्थियों एवं आयोजन में सहयोग देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।

