एचपी पेट्रोल पंप के पास कई दिनों से चल रहा बिल्डिंग तोड़ने का काम, ऊपर से मलबा फेंकने के दौरान हादसे का खतरा; पहले भी उठ चुका है मुद्दा, फिर भी जिम्मेदारों की चुप्पी पर सवाल
गुडडू किरार ✍️ मो- 9589362100
विदिशा। शहर के रेलवे स्टेशन के पास स्थित एचपी पेट्रोल पंप के नजदीक एक भवन को तोड़ने का काम इन दिनों गंभीर लापरवाही के बीच चल रहा है। भवन की ऊपरी मंजिल से तोड़फोड़ के दौरान निकलने वाला मलबा सीधे नीचे मुख्य मार्ग पर खड़ी ट्रॉली में फेंका जा रहा है। जिस मार्ग पर दिनभर वाहनों और राहगीरों की आवाजाही बनी रहती है, उसी के पास इस तरह भवन तोड़ने का काम किया जाना लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सवाल यह है कि किसी बड़े हादसे के बाद ही जिम्मेदारों की नींद खुलेगी या समय रहते कोई कार्रवाई भी होगी?

ऊपर से गिर रहा मलबा, नीचे से गुजर रहे लोग
भवन की छत से मलबा नीचे फेंकने के दौरान यह भी सुनिश्चित नहीं किया जा रहा कि आसपास से गुजरने वाले लोग और वाहन सुरक्षित हैं या नहीं। मुख्य मार्ग पर आवाजाही जारी रहने के बीच ऊपर से मलबा गिरना किसी भी समय दुर्घटना का कारण बन सकता है। यदि मलबे का कोई भारी टुकड़ा किसी राहगीर या वाहन पर गिर जाए, तो गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। ऐसे में निर्माण एवं ध्वस्तीकरण कार्य के दौरान सुरक्षा इंतजामों की अनदेखी का सवाल उठना लाजिमी है।
मलबे के साथ उड़ रही धूल, राहगीर परेशान
भवन तोड़ने के दौरान निकलने वाले मलबे को ट्रॉली में डालते समय बड़ी मात्रा में धूल उड़ रही है। इससे सड़क से गुजरने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। धूल के कारण राहगीरों और वाहन चालकों को असुविधा हो रही है। इसके बावजूद धूल को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त इंतजाम नजर नहीं आने की शिकायत सामने आ रही है। सवाल यह है कि क्या भवन तोड़ने के दौरान धूल रोकने और लोगों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी संबंधित पक्ष की नहीं है?

नवरात्र में मंदिर जाने वाले श्रद्धालु भी परेशान
नवरात्री का पर्व चल रहा है। इन दिनों बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए निकल रहे हैं। जहां पर यह बिल्डिंग थोड़ी जा रही है उसी के कुछ दूरी पर विदिशा का प्रसिद्ध सिद्धेश्वरी मंदिर है। जहां बड़ी संख्या में यहीं से होकर भक्त माता रानी के दर्शन वह पूजन अर्चना करने जा रहे हैं ।
शहर के प्रमुख मार्ग के पास उड़ती धूल और मलबे के कारण लोगों को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। त्योहार के दौरान जब सड़कों पर आवाजाही बढ़ जाती है, तब सुरक्षा और स्वच्छता के इंतजाम और भी जरूरी हो जाते हैं।
पिछले कई दिनों से चल रहा काम, पहले भी उठा था मुद्दा
बताया जा रहा है कि संबंधित भवन को तोड़ने का काम पिछले कई कई दिनों से चल रहा है। इस मामले में पहले भी मुद्दा उठाया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद कार्यस्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल बने हुए हैं। यदि लंबे समय से इस तरह काम चल रहा है, तो यह जानना जरूरी है कि संबंधित विभाग ने अब तक क्या निरीक्षण किया और सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर क्या कदम उठाए?
प्रशासन से सवाल—कार्रवाई कब होगी?
यह मामला केवल धूल और असुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा से भी जुड़ा है। भवन तोड़ने के दौरान बैरिकेडिंग, सुरक्षित दूरी, मलबा नीचे उतारने की उचित व्यवस्था और धूल नियंत्रण जैसे उपाय जरूरी हैं। ऐसे में संबंधित अधिकारियों को मौके का निरीक्षण कर सुरक्षा इंतजामों की जांच करनी चाहिए। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि रेलवे स्टेशन के पास मुख्य मार्ग से लगे इस स्थान पर भवन तोड़ने का काम इसी तरह चलता रहेगा या प्रशासन किसी संभावित हादसे से पहले जिम्मेदारी तय करेगा? क्या आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किसी दुर्घटना का इंतजार किया जाएगा, या समय रहते ठोस कदम उठाए जाएंगे? जिम्मेदार विभाग की कार्रवाई और जवाब का इंतजार है।

