बेतवा के बड़ वाले घाट पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
पूर्वजों की आत्मशांति के लिए किया तर्पण , 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या पर होगा समापन
विदिशा। पितरों के स्मरण, श्रद्धा और तर्पण का विशेष पर्व पितृ पक्ष शुरू हो गया है। पितृ पक्ष के अवसर पर शनिवार को विदिशा के बेतवा नदी स्थित बड़ वाले घाट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और अपने दिवंगत पूर्वजों का स्मरण करते हुए विधि-विधान से तर्पण किया। घाट पर सुबह से ही धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला दिखाई दिया।
पंचांग के अनुसार 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध का दिन है, जबकि पितृ पक्ष की मुख्य श्राद्ध तिथियों की शुरुआत 27 सितंबर से मानी जाती है और इसका समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या पर होगा।
मृत्यु तिथि के अनुसार किया जाता है श्राद्ध
पितृ पक्ष के दौरान परिवार अपने दिवंगत पूर्वजों की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। धार्मिक परंपरा में इन दिनों पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के साथ दान-पुण्य और सेवा कार्यों का भी विशेष महत्व माना गया है।
बड़ वाले घाट पर श्रद्धालुओं ने किया तर्पण
शनिवार सुबह बेतवा नदी के बड़ वाले घाट पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने नदी में स्नान के बाद अपने पितरों का स्मरण किया और तर्पण किया। कई परिवारों ने पुरोहितों के मार्गदर्शन में श्राद्ध कर्म और धार्मिक विधियां पूरी कीं। घाट पर पितरों की आत्मशांति के लिए पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु नजर आए।
पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता का पर्व है पितृ पक्ष

बड़ वाले घाट के पुजारी पंडित राजेंद्र प्रसाद दुबे ने बताया कि पितृ पक्ष केवल धार्मिक अनुष्ठान का अवसर नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और पारिवारिक संस्कारों को आगे बढ़ाने की परंपरा भी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए श्राद्ध एवं तर्पण से पितरों की आत्मशांति की कामना की जाती है तथा परिवार की सुख-शांति के लिए उनका आशीर्वाद मांगा जाता है।
उन्होंने बताया कि पितृ पक्ष में लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मण भोजन, गौ सेवा, जरूरतमंदों को भोजन एवं वस्त्र दान सहित अन्य सेवा और धार्मिक कार्य करते हैं।
10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या
पितृ पक्ष की अंतिम और महत्वपूर्ण तिथि सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को रहेगी। इस दिन उन सभी पितरों के निमित्त श्राद्ध-तर्पण किया जाता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं हो या जिनका श्राद्ध किसी कारण से निर्धारित तिथि पर न हो पाया हो।

