शहर के इन पांच गणेश मंदिरों में आस्था का अनोखा संसार, कहीं दूर होती हैं चिंताएं तो कहीं बीमारी से मुक्ति की मान्यता

गुड्डू किरार ✍️ 9589362100
विदिशा। विघ्नहर्ता, मंगलकर्ता और प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश के उत्सव का शुभारंभ होते ही विदिशा नगरी एक बार फिर गणपति भक्ति के रंग में रंगने जा रही है। शहर और आसपास के क्षेत्रों में गणेश उत्सव को तैयारी पूरी करल गई हैं। वहीं विदिशा की धार्मिक पहचान को खास बनाने वाले कई प्राचीन और प्रसिद्ध गणेश मंदिर भी भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बने हुए हैं।
इन मंदिरों से जुड़ी मान्यताएं और ऐतिहासिक प्रसंग इन्हें अन्य मंदिरों से अलग पहचान देते हैं। विदिशा में ऐसे कई गणेश धाम हैं, जहां श्रद्धालु केवल दर्शन के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी मनोकामना लेकर भी पहुंचते हैं। आइए जानते हैं विदिशा के उन प्रमुख गणेश मंदिरों के बारे में, जिनसे जुड़ी आस्था पीढ़ियों से चली आ रही है।
बाढ़ वाले गणेश—जल में डूबे रहे, फिर भी सुरक्षित रही प्रतिमा
बेतवा नदी के तट पर रंगई क्षेत्र में स्थित बाढ़ वाले श्री गणेश मंदिर विदिशा की अनोखी धार्मिक पहचान है। वर्ष 2005 में आई भीषण बाढ़ के दौरान मंदिर और गणेश प्रतिमा कई दिनों तक पानी में डूबी रही। इसके बावजूद प्रतिमा सुरक्षित रही। इस घटना के बाद श्रद्धालुओं के बीच भगवान गणेश को लेकर आस्था और गहरी हुई और मंदिर को ‘बाढ़ वाले गणेश’ के नाम से प्रसिद्धि मिली।
आज भी गणेश उत्सव के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान गणेश के दर्शन करते हैं।
डॉक्टर गणेश—जहां बीमारी से मुक्ति की आस्था

कृषि उपज मंडी यानी गल्ला मंडी परिसर में स्थित प्राचीन गणेश मंदिर को अब डॉक्टर गणेश मंदिर या वैद्य वाले गणेशजी के नाम से जाना जाता है। भक्तों के बीच ऐसी मान्यता है कि भगवान गणेश के दरबार में सच्चे मन से प्रार्थना करने और मन्नत मांगने से गंभीर बीमारियों से राहत मिलती है।
इसी विश्वास के चलते यहां आने वाले श्रद्धालु भगवान गणेश को अपने आरोग्य और सुख-समृद्धि का रक्षक मानते हैं।
चिंतामणि गणेश—चिंताओं और विघ्नों का हरते हैं संकट
एमएलबी स्कूल के समीप स्थित चिंतामणि गणेश मंदिर विदिशा के प्राचीन धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां स्थापित गणेश प्रतिमा को लेकर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है। मान्यता है कि भगवान चिंतामणि गणेश भक्तों की चिंताओं और जीवन में आने वाले विघ्नों को दूर करते हैं।
गणेश उत्सव के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।
संकट मोचन सिद्धिविनायक—दूर-दूर से पहुंचते हैं भक्त
रायसेन गेट के समीप स्थित संकट मोचन सिद्धिविनायक गणेश मंदिर भी शहर के प्रसिद्ध और प्राचीन गणेश मंदिरों में गिना जाता है। यहां भगवान गणेश को संकटों से मुक्ति और मनोकामना पूर्ण करने वाले सिद्धिविनायक के रूप में पूजा जाता है।
गणेश उत्सव के दौरान मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं और शहर सहित आसपास के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
उदयगिरि के गणेश—इतिहास और आस्था का अद्भुत संगम
विदिशा जिला मुख्यालय से करीब 7 किलोमीटर दूर स्थित उदयगिरि की गुफाएं केवल ऐतिहासिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि यहां भगवान गणेश की प्राचीन प्रतिमा भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है।
गुफा क्रमांक 6 के समीप स्थित बाल रूप गणेश प्रतिमा को चौथी शताब्दी, चंद्रगुप्त द्वितीय के काल से जोड़ा जाता है। इसे देश की प्राचीन गणेश प्रतिमाओं में शामिल माना जाता है। यहां भगवान गणेश की प्रतिमा इतिहास, पुरातत्व और धार्मिक आस्था—तीनों का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है।
गणपति उत्सव में डूबा विदिशा, गूंजे गणेश नाम
आज से शुरू होने जा रहे गणेश उत्सव को लेकर विदिशा में उत्साह का माहौल है। घरों से लेकर सार्वजनिक पंडालों तक गणपति बप्पा की स्थापना की जा रही हैं। प्रथम पूज्य भगवान गणेश की आराधना के साथ दस दिवसीय उत्सव में शहर भक्ति और उल्लास के रंग में रंगेगा।
विदिशा की खासियत यह है कि यहां गणेश भक्ति केवल उत्सव तक सीमित नहीं है। शहर के प्राचीन गणेश मंदिरों से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाएं, लोकमान्यताएं और श्रद्धालुओं की आस्था इन्हें धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाती हैं।
गणपति बप्पा मोरया… मंगल मूर्ति मोरया!

