
बागेश्वर धाम की पर्ची को लेकर विवाद, ‘पुत्र योग’ के दावे पर दंपती ने उठाया सवाल
गुड्डू किरार ✍️ मो- 9589362100
मऊरानीपुर के श्रद्धालु दंपती ने पर्चे में पुत्र योग और प्रेत बाधा का दावा होने की बात कही
भोपाल/ मध्यप्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम में पर्ची के माध्यम से किए जाने वाले दावों को लेकर एक श्रद्धालु दंपती ने सवाल उठाए हैं। मऊरानीपुर निवासी राजेंद्र श्रीवास का दावा है कि मई 2024 में बागेश्वर धाम में उनकी पत्नी के नाम से बनाई गई पर्ची में कथित तौर पर ‘पुत्र योग’ और ‘प्रेत बाधा’ का उल्लेख किया गया था।
राजेंद्र श्रीवास के अनुसार, उस समय उनके परिवार में पहले से तीन बेटियां थीं और वे आगे संतान की उम्मीद कर रहे थे। उनका कहना है कि पर्ची में पुत्र योग का उल्लेख देखकर उनके मन में आने वाली संतान को लेकर उम्मीद पैदा हुई थी।
परिवार ने आगे संतान के लिए योजना बनाई। हालांकि, 11 जून 2026 को उनके घर चौथी संतान के रूप में बेटी का जन्म हुआ। इसके बाद दंपती ने पर्ची में किए गए कथित दावे को लेकर सवाल उठाने का फैसला किया।
दंपती का कहना है कि इसके बाद वे अपनी पत्नी के साथ दोबारा बागेश्वर धाम पहुंचे। उनका उद्देश्य किसी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि पर्ची में लिखी बात का जवाब जानना था।
खबर के मुताबिक, दंपती ने मंच पर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के सामने अपना सवाल रखा। राजेंद्र श्रीवास का दावा है कि उन्होंने पूछा कि अगर पर्ची उन्हीं की ओर से बनाई गई थी, तो उसमें लिखी बात गलत कैसे साबित हुई।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कथित बातचीत के दौरान मौजूद सेवकों ने दंपती को मंच से नीचे जाने के लिए कहा। हालांकि, पूरे घटनाक्रम को लेकर बागेश्वर धाम या संबंधित पक्ष की ओर से आधिकारिक रूप से क्या स्पष्टीकरण दिया गया, इसकी स्वतंत्र पुष्टि रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं बताई गई है।
इस मामले में मुख्य सवाल पर्ची में लिखे ‘पुत्र योग’ के दावे की स्वतंत्र पुष्टि और उसकी जवाबदेही को लेकर उठ रहा है। यदि किसी व्यक्ति के नाम से भविष्य से जुड़ा दावा लिखित रूप में किया जाता है और वह दावा सही साबित नहीं होता, तो उस दावे के आधार और जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
खबर में यह भी कहा गया है कि धार्मिक आस्था व्यक्तिगत विश्वास का विषय है। भारत में करोड़ों लोग धार्मिक परंपराओं और आध्यात्मिक मान्यताओं से जुड़े हुए हैं। लेकिन जब किसी दावे का संबंध भविष्यवाणी, संतान, बीमारी, इलाज या जीवन के किसी महत्वपूर्ण निर्णय से हो, तब उसके प्रमाण और जवाबदेही पर सवाल उठाना भी सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

